बिहार के छात्र प्रतिभाशाली उचित मार्गदर्शन का आभाव कहा चर्चित गणितज्ञ आर एस राठौर ने
पटना। बिहार के लाखों छात्रों को विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता दिला चुके गणित के जादूगर के नाम से मशहूर चर्चित गणितज्ञ आरिश राठौर सर ने पटना में एक प्रेस वार्ता का आयोजन कर कहा कि बिहार के छात्रों में प्रतिभा की कमी नहीं पर उचित मार्गदर्शन का भाव है उन्होंने कहा कि बिहार के छात्रों के लिए सबसे बड़ी समस्या भाषा की है अंग्रेजी भाषा के ज्ञान के बिना किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता प्राप्त करना आसान नहीं जबकि बिहार के बच्चे अन्य विषयों में तो काफी होनहार होते हैं पर उनकी अंग्रेजी काफी कमजोर होती है और इसके लिए बिहार सरकार की दसवीं तक की शिक्षा प्रणाली दोषी है जिसके अंतर्गत अंग्रेजी में मैट्रिक में पास होना ही मात्र अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि वे पिछले तीन दशकों से बिहार के छात्रों का मार्गदर्शन कर रहे हैं यहां के छात्र काफी मेहनती जुनूनी और कठिन परिश्रम करने वाले होते हैं अगर उन्हें उचित मार्गदर्शन मिला तो वह किसी भी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर लेते हैं उनके पढ़ाए लाखों की तादाद में छात्र विभिन्न पदों पर पूरे देश में कार्यरत हैं। गणित को लेकर उन्होंने कहा कि बिना गणित के जीवन में सफलता का सूत्र नहीं बन सकता गणित को लेकर यह हुआ है कि काफी कठिन विषय है जबकि गणित काफी आसान विषय है इसके लिए लगन और निरंतर अभ्यास की जरूरत है वह विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने आने वाले छात्रों को काफी आसान ट्रिक के माध्यम से गणित के सवालों को हल करने की तकनीक बताते हैं जिसके कारण उनके पढ़ाए गए छात्रों की तादाद सफलता दर में सबसे ज्यादा होती है उन्होंने कहा कि जिस तरह के माहौल अभी प्रदेश देश में है इससे छात्र दिग्भ्रमित है पर उन्हें दिग्भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं प्रतियोगिता परीक्षाओं का आयोजन केंद्र और राज्य स्तर पर हो रहा है विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में लाखों की तादाद में वैकेंसी भी आने वाली है इसलिए छात्रों को किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है तथा निरंतर अभ्यास करने की जरूरत है उन्होंने कहा कि उनके संस्थान के माध्यम से छात्रों का ऑफलाइन और ऑनलाइन निरंतर मार्गदर्शन किया जा रहा है वे चाहते हैं कि बिहार के छात्र अपनी प्रतिभा बुद्धिमता और कठिन परिश्रम के कारण ही जाने जाए किसी भी प्रकार के बहकावे में आकर कोई ऐसा कार्य ना करें जिससे बिहार की छवि बदनाम हो उन्होंने कहा एक शिक्षक होने के नाते छात्रों को शिक्षा के साथ ही साथ संस्कार भी देते हैं बिना संस्कार के शिक्षा उसी प्रकार है जिस प्रकार बिना सुगंध के पुष्प।
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